उसकी रचनाएँ उसका पता देती हैं

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सबसे अधिक जो अल्लाह के अस्तित्व का पता देती है वह है उसकी रचनाएँ जिनको उसने बनाया है lऔर जिनको बहुत सुंदर बनाया, यह रचनाएँ जिनको उसने पैदा किया और उसकी कृपाएं भी उसका पता देती हैं जो उसने अपने दासों पर रखी हैं चाहे नास्तिक हो या भक्त हो l

पवित्र क़ुरआन अल्लाह के चमत्कार और उसकी क्षमता पर सब से बड़ा गवाह है lअल्लाह सर्वशक्तिमान ने उस में अगलों और पिछलों का समाचार रख दिया है lऔर उसमें ऐसी अनदेखी और अनसुनी बातों का खुलासा किया जिसका पहले कभी भी मनुष्य को पता नहीं था lयहाँ हम पवित्र क़ुरआन में उल्लेखित कुछ चमत्कारों को आपके सामने रखते हैं जिनसे साफ़ संकेत मिलता है कि अल्लाह का अस्तित्वऔर उसका ज्ञान सब चीज़ों से पहले से हैl
* वैज्ञानिकों ने लौहा के धातु घटकों को पता करने की बहुत कोशिश की क्योंकि जो ऊर्जा उसके गुटों को जोड़ने के लिए दरकार हैं वह तो हमारे सौर सूर्य मंडल में उपलब्ध शक्ति से चार गुना बढ़कर है... यह बात वैज्ञानिकों के लिए बहुत अजीब थी, लेकिन यह तथ्य इस्लामी विद्वानों के लिए कोई हैरानी की बात नहीं थी जो अल्लाह सर्वशक्तिमान के शब्दों को पढ़ते और समझते हैं lअल्लाह सर्वशक्तिमान लोहा के विषय में फ़रमाता है:

" وَأَنزَلْنَا الْحَدِيدَ فِيهِ بَأْسٌ شَدِيدٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ وَلِيَعْلَمَ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ وَرُسُلَهُ بِالْغَيْبِ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٌ " ( سورة الحديد : 25(

“और लोहा भी उतारा, जिसमें बड़ी दहशत है और लोगों के लिए कितने ही लाभ है, और (किताब एवं तुला इसलिए भी उतारी) ताकि अल्लाह जान ले कि कौन परोक्ष मेंरहते हुए उसकी और उसके रसूलों की सहायता करता है। निश्चय ही अल्लाहशक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है।”

मुस्लिम विद्वानों को तुरंत पता चल गया कि अल्लाह सर्वशक्तिमान ने तोलोहा के विषय में “उतारा”का शब्द फ़रमाया है इससे सिद्ध होता है कि लोहा के घटक पार्थिव नहीं हैं बल्कि वह तो आकाश से नीचे उतारा गया है । और आधुनिक युग में वैज्ञानिकों ने भी इसी की पुष्टि की है कि लोहा के घटक पृथ्वी के घटक नहीं हैं ।
* अब चलिए जरा हम समुद्र की गहराई में डुबकी लगाते हैं क्योंकि सागरों की भूवैज्ञानिक विशेषताओं के माहेरीन ने पता लगाया है कि सागरों की भूवैज्ञानिक विशेषताएं बिल्कुल वही हैं जो अल्लाह सर्वशक्तिमान ने पवित्र क़ुरआन में उल्लेख किया है, अल्लाह सर्वशक्तिमान का फ़रमान है :

" أَوْ كَظُلُمَاتٍ فِي بَحْرٍ لُّجِّيٍّ يَغْشَاهُ مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِ مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِ سَحَابٌ ظُلُمَاتٌ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍ إِذَا أَخْرَجَ يَدَهُ لَمْ يَكَدْ يَرَاهَا وَمَن لَّمْ يَجْعَلِ اللَّهُ لَهُ نُورًا فَمَا لَهُ مِن نُّورٍ " ( سورة النور : 40(

"या फिर जैसे एक गहरे समुद्र में अँधेरे, लहर के ऊपर लहर छा रही हैं; उसकेऊपर बादल है, अँधेरे है एक पर एक। जब वह अपना हाथ निकाले तो उसे वह सुझाईदेता प्रतीत न हो। जिसे अल्लाह ही प्रकाश न दे फिर उसके लिए कोई प्रकाशनहीं।"(सूरत अन-नूर: ४०) इस तथ्य का पता ऐसे नहीं चला बल्कि इसके लिए सैकड़ों समुद्री टर्मिनल की स्थापना हुई और उपग्रह इमेजिंग उद्योग के द्वारा फोटो लिए गए तब जाकर इस तथ्य का खुलासा हुआ .. इस रिपोर्ट के मालिक (Professor Rashryder) प्रोफेसर श्रोएडर पश्चिम जर्मनी में समुद्री वैज्ञानिकों केसबसे बड़े वैज्ञानिक हैं, उन्होंने इस आयत को सुन कर कहा कि: यह किसी मनुष्य का शब्द नहीं हो सकता है ।.. एक दूसरे प्रोफेसर और सागर के भूविज्ञान के विशेषज्ञ , प्रोफेसर Professor Dorjaro इस आयत के विषय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या करते हुए कहते हैं: "अतीत में मनुष्य बिना मशीनरी के इस्तेमाल के बीस मीटर से अधिक समुद्र की गहराई में डुबकी नहीं लगा सकते थे .. लेकिन अब हम आधुनिक उपकरणों के द्वारा समुद्र में दो सौ मीटर की गहराई तक डुबकी लगाई जा रही है और हम देख रहे हैं कि दो सौ मीटर की गहराई पर बहुत अधिक अंधेरा है।
शुभ आयत में “बहरिन लुज्जी”(एक गहरे समुद्र में) का शब्द आया है और गहरे समुद्र की खोजों से संबंधित जो फ़ोटोज़ लिए गए हैं उन में इस शुभ आयत के अर्थ की साफ़ साफ़ सच्चाई प्रमाणित होती है:

)ظُلُمَاتٌ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍ(

(अँधेरे हैं एक पर एक) और यह बात सब अच्छी तरह जानते हैं कि स्पेक्ट्रम के सात अलग अलग रंग होते हैं लाल, पीला, नीला, हरा,नारंगी आदि, यदि हम समुद्र की गहराई में डुबकी लगाते हैं तो एक बाद एक सारे रंग गायब हो जाते हैं .. और इन रंगों के गायब होने से अंधेरा पैदा होता है, पहले लाल रंग गायब होता है फिर नारंगी, उसके बाद पीला, सबसे आखिर में नीला रंग गायब होता है मतलब दो सौ मीटर की गहराई पर नीला रंग गायब होता है .. यह सारे रंगों के गायब होने से  बिल्कुल अँधेरा ही अंधेरा बाक़ी रह जाता है.. और अल्लाह सर्वशक्तिमान ने जो फ़रमाया :

)مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِ مَوْجٌ(

(लहर के ऊपर लहर छा रही हैं), यहाँ यह बात स्प्ष्ट रहे कि वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध किया जा चुका है कि समुद्र के गहरे हिस्से और ऊपरी भाग के बीच एक विभाजन रेखा है .. लेकिन हम उसे नहीं देख पाते हैं और समुद्र की ऊपरी सतह पर लहरें हैं जिनको हम देखते हैं इसलिए ऐसा लगता है कि लहर पर लहर है।याद रहे कि यह एक तथ्य है जिसकी वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है इसलिए प्रोफेसर दारजारो Professor Dorjaro ने इस आयत के विषय में साफ़ साफ़ कहाकि यह आयत किसी मानव ज्ञान का फल नहीं है ।
जी हाँ, यही अल्लाह की शान है अगर अभी तक आपको उसकी परिचय नहीं मिल पाई हो तो अब परिचित हो जाइए।

उसके चमत्कार और उसकी रचनाओं में सोचिए ।आकाश को देखिए कौन उसे गिरने से रोकता है?
इस बात में ज़रा सोचिए कि आपके पैरों के नीचे कैसे भूमि को बराबर बनाया ?
ज़रा इस बात में नज़र दौड़ा कर देखिए कि कौन यह सारे सिस्टम को नियंत्रण में रखता है ?
जी हाँ, वह अल्लाह है जो अमर है और सबको संभालनेवाला है ।

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