हाशिम की शादी की कहानी

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जब मक्का में लोगों की भूख और गरीबी सख्त हो गर्इ, तो अम्र बिन मनाफ (नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के परदादा हाशिम) ने किसी ऐसे उपाय के बारे में सोचा जिससे वह अपने बाल बच्चों को इस परेशानी से नजात दिला सकें। चुनाँचे वह गर्मियों में शाम की ओर और सर्दियों में यमन की ओर यात्रा करते थे ताकि वह व्यापार करें और अपनी क़ौम के पास खाने की चीज़ें लेकर आयें। वह पहले व्यक्ति थे जिन्हों ने मक्का वालों को शाम और यमन की ओर तिजारत के लिए यात्रा करना सिखाया। अल्लाह तआला ने इन दोनों यात्राओं का वर्णन सूरत क़ुरैश में किया है।

एक बार जब हाशिम शाम की ओर यात्रा पर थे, तो वह यसरिब - मदीना - से गुज़रे। वहाँ उन्हों ने बनू नज्जार नामी गोत्र की एक महिला सलमा बिन्त अम्र से शादी कर ली, फिर कुछ दिन ठहरने के बाद उन्हें वहीं छोड़कर चले गए, इस हाल में कि वह उनके बेटे के साथ गर्भ की अवस्था में थीं, ताकि वह अपने परिवार वालों के बीच में ही जनें जिन्हों ने यह शर्त लगार्इ थी कि सलमा उनके बीच ही जनेंगी।

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