इन्सानों का सुधार | जानने अल्लाह

इन्सानों का सुधार


Site Team

इन्सान का दो तरीक़ों से सुधार किया जा सकता है—अन्दर से बाहर की तरफ़ (Outward) और बाहर से अन्दर की तरफ़ (Inward)।
एक तरीक़ा यह है कि क़ानून, ताक़त या सज़ा का डर पैदा करके इन्सान को बुराई करने से रोका जाए और दूसरा तरीक़ा यह है कि अन्दर अर्थात् अक़ीदा (धर्म के प्रति आस्था एवं विश्वास) के द्वारा (अल्लाह है, देख रहा है और उसका सामना करना है)। इस्लाम इसी दूसरे तरीक़े को प्रमुखता व प्राथमिकता देता है, क्योंकि समाज में ऐसे भी लोग होते हैं जो बेहद ताक़तवर हैं, जिन्हें क़ानून और ताक़त आदि किसी चीज़ का डर नहीं होता। उन्हें केवल एकेश्वरवाद की धारणा ही ठीक रख सकती है। यह धारणा अथवा आस्था सामाजिक चेतना (Civic sense) पैदा करती है। एकेश्वरवाद का मानने वाला एक ज़िन्दा अल्लाह को मानता है। इसलिए वह कभी ट्रैफिक की लाल बत्ती नहीं फलांगता, सरकारी सम्पत्ति (Property) को बरबाद नहीं करता। एकेश्वरवाद का मानने वाला एक अच्छा पिता, एक अच्छा पति, एक अच्छा मैनेजर, अच्छा नेता, अच्छा व्यापारी, अच्छा सैनिक, अच्छा शिक्षक, अच्छा डॉक्टर, अच्छा इंजीनियर अच्छा क्लर्क अच्छा वकील, अच्छा जज, अच्छा पुलिसकर्मी अच्छा ऑफिसर, अच्छा मातहत अच्छा मंत्री, अच्छा उद्योगपति, अच्छा किसान, अच्छा श्रमिक आदि साबित होता है।

Previous article

Related Articles with इन्सानों का सुधार

  • क़ुरआन की शिक्षाएं

    Site Team

    हर प्रकार की हम्द व सना (प्रशंसा और गुणगान) केवल अल्लाह के लिए योग्य है, हम उसी की प्रशंसा करते हैं, उसी से मदद

    03/04/2014 3702
  • इस्लाम धर्म की खूबियाँ पहला भाग

    Site Team

    चूँकि इस्लाम धर्म समस्त आसमानी धर्मों में सब से अन्त में उतरने वाला धर्म है इसलिए आवश्यक था कि वह ऐसी विशेषताओं और

    04/05/2013 21447
  • भूकंपों की अधिकता के कारण

    Site Team

    कई सारे देश जैसे कि : तुर्की, मेक्सिको, ताईवान, जापान, और अन्य देश ... भूकंप से ग्रस्त हुए हैं तो क्या ये किसी

    17/11/2013 2522
जानने अल्लाहIt's a beautiful day