ज़ख़्मी पर हमला न किया जाए
‘‘किसी ज़ख़्मी पर हमला न करो।’’ अभिप्राय है वह ज़ख़्मी जो लड़ने के क़ाबिल न रहा हो, न अमली तौर पर लड़ रहा हो।
‘‘किसी ज़ख़्मी पर हमला न करो।’’ अभिप्राय है वह ज़ख़्मी जो लड़ने के क़ाबिल न रहा हो, न अमली तौर पर लड़ रहा हो।
चूँकि इस्लाम धर्म समस्त आसमानी धर्मों में सब से अन्त में उतरने वाला धर्म है इसलिए आवश्यक था कि वह ऐसी विशेषताओं और
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02/07/2013 2596इस्लाम धर्म व्यापक शांति का धर्म है जितना कि यह शब्द अपने अन्दर अर्थ रखता है, चाहे उसका संबंध मुसिलम समाज के घरेलू
04/05/2013 3987